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mahabharat 6.17.33: उसके विशाल हाथी, जो अस्त्र-शस्त्र, तलवार, तरकश और ध्वजाओं से सुसज्जित थे, पर्वतों के समान प्रतीत हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.17: कौरवमहारथियोंका युद्धके लिये आगे बढ़ना तथा उनके व्यूह, वाहन और ध्वज आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 17: कौरवमहारथियोंका युद्धके लिये आगे बढ़ना तथा उनके व्यूह, वाहन और ध्वज आदिका वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.17.33 
तस्य पर्वतसंकाशा व्यरोचन्त महागजा:।
यन्त्रतोमरतूणीरै: पताकाभि: सुशोभिता:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
उसके विशाल हाथी, जो अस्त्र-शस्त्र, तलवार, तरकश और ध्वजाओं से सुसज्जित थे, पर्वतों के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
His huge elephants, adorned with weapons, swords, quivers and flags, appeared like mountains.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)