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mahabharat 6.17.28: अंग देश के राजा और बुद्धिमान कृपाचार्य द्वारा संरक्षित पूर्व दिशा से आने वाली क्षत्रियों की वह विशाल सेना शरद ऋतु के बादलों के समान शोभायमान थी।   |   mahabharat अध्याय 6.17: कौरवमहारथियोंका युद्धके लिये आगे बढ़ना तथा उनके व्यूह, वाहन और ध्वज आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.17.28 
तदङ्गपतिना गुप्तं कृपेण च मनस्विना।
शारदाम्बुधरप्रख्यं प्राच्यानां सुमहद् बलम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
अंग देश के राजा और बुद्धिमान कृपाचार्य द्वारा संरक्षित पूर्व दिशा से आने वाली क्षत्रियों की वह विशाल सेना शरद ऋतु के बादलों के समान शोभायमान थी।
 
That huge army of Kshatriyas from the east, protected by the King of Angas and the intelligent Kripacharya, looked as beautiful as the clouds of autumn.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)