Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.17.27: कृपाचार्य एक बहुमूल्य रथ पर आसीन होकर, जिस पर वृषभ चिन्हित ध्वजा और पताकाएँ लगी हुई थीं, मगध की श्रेष्ठ सेना के साथ चल रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.17: कौरवमहारथियोंका युद्धके लिये आगे बढ़ना तथा उनके व्यूह, वाहन और ध्वज आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 17: कौरवमहारथियोंका युद्धके लिये आगे बढ़ना तथा उनके व्यूह, वाहन और ध्वज आदिका वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.17.27 
स्यन्दनेन महार्हेण केतुना वृषभेण च।
प्रकर्षन्नेव सेनाग्रं मागधस्य कृपो ययौ॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कृपाचार्य एक बहुमूल्य रथ पर आसीन होकर, जिस पर वृषभ चिन्हित ध्वजा और पताकाएँ लगी हुई थीं, मगध की श्रेष्ठ सेना के साथ चल रहे थे।
 
Seated on a precious chariot bearing flags and banners marked with a bull, Krupacharya was moving with the best army of Magadha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)