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mahabharat 6.17.20-21h: गोवा के शासक महाराज शैब्य अपने अधीनस्थ राजाओं के साथ ध्वजा से सुसज्जित राजसी हाथी पर सवार होकर युद्ध के लिए चल पड़े। कमल के समान चमकते हुए अश्वत्थामा सिंह की पूँछ के चिह्न वाले ध्वज वाले रथ पर सवार होकर पूरी सेना के आगे चल रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.17: कौरवमहारथियोंका युद्धके लिये आगे बढ़ना तथा उनके व्यूह, वाहन और ध्वज आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 17: कौरवमहारथियोंका युद्धके लिये आगे बढ़ना तथा उनके व्यूह, वाहन और ध्वज आदिका वर्णन  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  6.17.20-21h 
स तु गोवासन: शैब्य: सहित: सर्वराजभि:।
ययौ मातङ्गराजेन राजार्हेण पताकिना।
पद्मवर्णस्त्वनीकानां सर्वेषामग्रत: स्थित:॥ २०॥
अश्वत्थामा ययौ यत्त: सिंहलाङ्गूलकेतुना।
 
 
अनुवाद
गोवा के शासक महाराज शैब्य अपने अधीनस्थ राजाओं के साथ ध्वजा से सुसज्जित राजसी हाथी पर सवार होकर युद्ध के लिए चल पड़े। कमल के समान चमकते हुए अश्वत्थामा सिंह की पूँछ के चिह्न वाले ध्वज वाले रथ पर सवार होकर पूरी सेना के आगे चल रहे थे।
 
Maharaja Shaibya, the ruler of Goa, along with the kings under his command, rode on a royal elephant adorned with a flag and proceeded for the battle. Ashwatthama, shining like a lotus, rode on a chariot bearing a flag bearing the mark of a lion's tail and marched ahead of the entire army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)