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mahabharat 6.16.22: उनके सिर पर श्वेत पगड़ी शोभायमान थी। उनके घोड़े भी श्वेत थे। उन्होंने शरीर पर श्वेत कवच धारण किया था। महाराज! मैंने देखा कि भीष्मजी, जो अपनी मर्यादा से कभी विचलित नहीं होते थे, अपनी श्वेत आभा के कारण उदित होते हुए चंद्रमा के समान शोभायमान थे।   |   mahabharat अध्याय 6.16: दुर्योधनकी सेनाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 16: दुर्योधनकी सेनाका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.16.22 
श्वेतोष्णीषं श्वेतहयं श्वेतवर्माणमच्युतम्।
अपश्याम महाराज भीष्मं चन्द्रमिवोदितम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उनके सिर पर श्वेत पगड़ी शोभायमान थी। उनके घोड़े भी श्वेत थे। उन्होंने शरीर पर श्वेत कवच धारण किया था। महाराज! मैंने देखा कि भीष्मजी, जो अपनी मर्यादा से कभी विचलित नहीं होते थे, अपनी श्वेत आभा के कारण उदित होते हुए चंद्रमा के समान शोभायमान थे।
 
A white turban looked beautiful on his head. His horses were also white. He wore a white armour on his body. Maharaj! I saw Bhishmaji, who never deviated from his decorum, looking as beautiful as the rising moon due to his white luster.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)