श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 16: दुर्योधनकी सेनाका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.16.13 
महेन्द्रकेतव: शुभ्रा महेन्द्रसदनेष्विव।
संनद्धास्ते प्रवीराश्च ददृशुर्युद्धकाङ्क्षिण:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जैसे इन्द्रभवन में देवराज इन्द्र की चमकती हुई ध्वजाएँ फहरा रही थीं, वैसे ही कौरव और पाण्डव सेनाओं की ध्वजाएँ भी फहरा रही थीं। दोनों सेनाओं के प्रधान योद्धा युद्ध की इच्छा से कवच आदि से सुसज्जित दिखाई दे रहे थे॥13॥
 
Just as the shining flags of the king of gods Indra flutter in the Indra Bhawan, similarly the flags of the Kaurava and Pandava armies were also fluttering. The chief warriors of both the armies were seen decked in armour etc. with the desire for war.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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