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महाराज मनुष्येषु निन्द्यं य: सर्वमाचरेत्।
स वध्य: सर्वलोकस्य निन्दितानि समाचरन्॥ ३॥
अनुवाद
महाराज! जो मनुष्य मानव समाज में अत्यन्त निन्दनीय आचरण करता है, वह ऐसा निन्दनीय कर्म करने के कारण सबके द्वारा मारे जाने योग्य है।॥3॥
Maharaj! A person who behaves in a very condemnable manner in human society, deserves to be killed by everyone because of doing such a condemnable deed. ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥