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mahabharat 6.15.3: महाराज! जो मनुष्य मानव समाज में अत्यन्त निन्दनीय आचरण करता है, वह ऐसा निन्दनीय कर्म करने के कारण सबके द्वारा मारे जाने योग्य है।॥3॥   |   mahabharat अध्याय 6.15: संजयका युद्धके वृत्तान्तका वर्णन आरम्भ करना—दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये समुचित व्यवस्था करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 15: संजयका युद्धके वृत्तान्तका वर्णन आरम्भ करना—दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये समुचित व्यवस्था करनेका आदेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.15.3 
महाराज मनुष्येषु निन्द्यं य: सर्वमाचरेत्।
स वध्य: सर्वलोकस्य निन्दितानि समाचरन्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जो मनुष्य मानव समाज में अत्यन्त निन्दनीय आचरण करता है, वह ऐसा निन्दनीय कर्म करने के कारण सबके द्वारा मारे जाने योग्य है।॥3॥
 
Maharaj! A person who behaves in a very condemnable manner in human society, deserves to be killed by everyone because of doing such a condemnable deed. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)