संरक्ष्यमाण: पार्थेन भीष्मेण च विवर्जित:।
यथा न हन्याद् गाङ्गेयं दु:शासन तथा कुरु॥ २०॥
अनुवाद
तो दुःशासन! भीष्म द्वारा उपेक्षित और अर्जुन द्वारा संरक्षित, जिस प्रकार गंगनन्दन भीष्म को शिखण्डी नहीं मार सका, उसी प्रकार प्रयत्न करो। 20॥
‘So Dushasan! Ignored by Bhishma and protected by Arjun, make efforts just as Shikhandi could not kill Ganganandan Bhishma. 20॥
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्गीतापर्वणि दुर्योधनदु:शासनसंवादे पञ्चदशोऽध्याय:॥ १५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत श्रीमद्भगवद्गीतापर्वमें दुर्योधन-दु:शासनसंवादविषयक पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)