श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 15: संजयका युद्धके वृत्तान्तका वर्णन आरम्भ करना—दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये समुचित व्यवस्था करनेका आदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.15.2 
य आत्मनो दुश्चरितादशुभं प्राप्नुयान्नर:।
एनसा तेन नान्यं स उपाशङ्कितुमर्हति॥ २॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति अपने बुरे कर्मों का फल भोग रहा है, उसे अपने पापों के लिए दूसरों को दोष नहीं देना चाहिए ॥2॥
 
A person who is facing the consequences of his bad deeds should not blame others for his sins. ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)