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mahabharat 6.15.14: इस समय युद्ध में भीष्म की रक्षा से बढ़कर मैं और कोई कार्य नहीं मानता, क्योंकि यदि वे सुरक्षित रहें तो वे कुन्तीपुत्रों, सोमवंशियों तथा सृंजयों को भी मार सकते हैं॥ 14॥   |   mahabharat अध्याय 6.15: संजयका युद्धके वृत्तान्तका वर्णन आरम्भ करना—दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये समुचित व्यवस्था करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 15: संजयका युद्धके वृत्तान्तका वर्णन आरम्भ करना—दुर्योधनका दु:शासनको भीष्मकी रक्षाके लिये समुचित व्यवस्था करनेका आदेश  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.15.14 
नात: कार्यतमं मन्ये रणे भीष्मस्य रक्षणात्।
हन्याद् गुप्तो ह्यसौ पार्थान् सोमकांश्च ससृंजयान्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इस समय युद्ध में भीष्म की रक्षा से बढ़कर मैं और कोई कार्य नहीं मानता, क्योंकि यदि वे सुरक्षित रहें तो वे कुन्तीपुत्रों, सोमवंशियों तथा सृंजयों को भी मार सकते हैं॥ 14॥
 
At this time in the war I do not consider any other task more important than the protection of Bhishma, because if he is safe then he can kill the sons of Kunti, the descendants of Soma and even the Srinjayas.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)