श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 70-72h
 
 
श्लोक  6.14.70-72h 
यच्छरीरैरुपास्तीर्णां नरवारणवाजिनाम्॥ ७०॥
शरशक्तिमहाखड्गतोमराक्षां महाभयाम्।
प्राविशन् कितवा मन्दा: सभां युद्धदुरासदाम्॥ ७१॥
प्राणद्यूते प्रतिभये केऽदीव्यन्त नरर्षभा:।
 
 
अनुवाद
संजय! जहाँ मनुष्य, हाथी और घोड़ों के शरीर बिछे हुए थे, जहाँ बाण, भाले, बड़ी-बड़ी तलवारें और पासे रूपी गदाएँ फेंकी जा रही थीं, जो युद्ध के कारण दुर्गम और अत्यन्त भयंकर थी, उस रणभूमि रूपी द्यूतशाला में कौन-से मूर्ख जुआरी घुसे थे? जहाँ प्राणों की बाजी लगा दी जाती थी, उस भयंकर द्यूत क्रीड़ा में कौन-से वीर पुरुष खेले थे?॥ 70-71 1/2॥
 
Sanjaya! Which foolish gamblers had entered the battlefield-like gambling hall where the bodies of men, elephants and horses were spread, where arrows, spears, great swords and maces in the form of dice were thrown, which was inaccessible and extremely frightening due to the war? Which brave men had played that dreadful game of gambling where lives were put at stake?॥ 70-71 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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