श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 67-68
 
 
श्लोक  6.14.67-68 
अनीकानि विनिघ्नन्तं ह्रीमन्तमपराजितम्॥ ६७॥
कथं शान्तनवं तातं पाण्डुपुत्रा न्यवारयन्।
कथं युक्तान्यनीकानि कथं युद्धं महात्मभि:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
भीष्म तो किसी से पराजित न होने वाले तथा विनयशील थे। शत्रु सेना का संहार करते समय पाण्डवों ने मेरे चाचा भीष्म को किस प्रकार रोका? उन महाहृदयी योद्धाओं ने अपनी सेनाओं को संगठित करके किस प्रकार युद्ध किया?॥67-68॥
 
Bhishma was one who could not be defeated by anyone and was modest. How did the Pandavas stop my uncle Bhishma while he was destroying the enemy forces? How did those great-hearted warriors organize their armies and fight the war?॥ 67-68॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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