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mahabharat 6.14.61-62h: मुझे बड़ी आशा थी कि शान्तनुपुत्र भीष्म मेरे पक्ष की रक्षा करेंगे। इस समय मैं अपने पुत्र के शोक से अत्यंत व्यथित और चिंतित हूँ।   |   mahabharat अध्याय 6.14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 61-62h
 
 
श्लोक  6.14.61-62h 
पुत्रशोकाभिसंतप्तो महद् दु:खमचिन्तयम्॥ ६१॥
आशंसेऽहं परं त्राणं भीष्माच्छान्तनुनन्दनात्।
 
 
अनुवाद
मुझे बड़ी आशा थी कि शान्तनुपुत्र भीष्म मेरे पक्ष की रक्षा करेंगे। इस समय मैं अपने पुत्र के शोक से अत्यंत व्यथित और चिंतित हूँ।
 
I had great hopes that Bhishma, the son of Shantanu, would save my side. At this time, I am deeply troubled and worried by the grief of my son. 61 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)