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mahabharat 6.14.59-60h: ऐसा प्रतीत होता है कि शस्त्र, शौर्य, तप, बुद्धि, धैर्य और त्याग से भी कोई मृत्यु से नहीं बच सकता। 59 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 59-60h
 
 
श्लोक  6.14.59-60h 
न चास्त्रेण न शौर्येण तपसा मेधया न च॥ ५९॥
न धृत्या न पुनस्त्यागान्मृत्यो: कश्चिद् विमुच्यते।
 
 
अनुवाद
ऐसा प्रतीत होता है कि शस्त्र, शौर्य, तप, बुद्धि, धैर्य और त्याग से भी कोई मृत्यु से नहीं बच सकता। 59 1/2॥
 
It seems that no one can escape death even through weapons, bravery, penance, intelligence, patience and sacrifice. 59 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)