श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 58-59h
 
 
श्लोक  6.14.58-59h 
यस्मिन्नस्त्राणि मेधा च नीतिश्च पुरुषर्षभे॥ ५८॥
अप्रमेयाणि दुर्धर्षे कथं स निहतो युधि।
 
 
अनुवाद
वह रत्न पुरुष और वीर योद्धा जिसके पास शस्त्र, बुद्धि और नीति ये तीन अतुलनीय शक्तियाँ थीं, युद्ध में कैसे मर गया? 58 1/2॥
 
How did that gem of a man and a brave warrior who had three incomparable powers: weapons, intelligence and policy, die in the war? 58 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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