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mahabharat 6.14.57-58h: मैं समझता हूँ कि भीष्म की मृत्यु से मेरे पुत्रों को अत्यन्त दुःख हुआ होगा। संजय! मेरा हृदय निश्चय ही लोहे का बना है, जो सिंह-पुरुष भीष्म के मारे जाने का समाचार सुनकर भी नहीं टूट रहा है।   |   mahabharat अध्याय 6.14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 57-58h
 
 
श्लोक  6.14.57-58h 
भीष्मे हते भृशं दु:खान्मन्ये शोचन्ति पुत्रका:।
अद्रिसारमयं नूनं हृदयं मम संजय॥ ५७॥
यच्छ्रुत्वा पुरुषव्याघ्रं हतं भीष्मं न दीर्यते।
 
 
अनुवाद
मैं समझता हूँ कि भीष्म की मृत्यु से मेरे पुत्रों को अत्यन्त दुःख हुआ होगा। संजय! मेरा हृदय निश्चय ही लोहे का बना है, जो सिंह-पुरुष भीष्म के मारे जाने का समाचार सुनकर भी नहीं टूट रहा है।
 
I understand that my sons must have been extremely saddened by the death of Bhishma. Sanjaya! My heart is certainly made of iron, which is not breaking even on hearing that the lion-man Bhishma has been killed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)