Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.14.54-55h: जैसे ग्वालों के बिना गायों का झुंड इधर-उधर भटकता रहता है, वैसे ही मेरी सेना भी अब भ्रमित हो रही होगी। महायुद्ध के समय सम्पूर्ण जगत के परम मानवीय स्वरूप प्रतीत होने वाले भीष्म कब परलोक सिधार गए? उस समय आपके मन की क्या स्थिति थी? 54 1/2। | mahabharat अध्याय 6.14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे ग्वालों के बिना गायों का झुंड इधर-उधर भटकता रहता है, वैसे ही मेरी सेना भी अब भ्रमित हो रही होगी। महायुद्ध के समय सम्पूर्ण जगत के परम मानवीय स्वरूप प्रतीत होने वाले भीष्म कब परलोक सिधार गए? उस समय आपके मन की क्या स्थिति थी? 54 1/2।
Just like a herd of cows wanders here and there without a cowherd, similarly my army must be getting confused now. When did Bhishma, who seemed to embody the ultimate humane nature of the whole world during the great war, go to the other world? What was the state of your mind at that time? 54 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥