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श्लोक 6.14.5  |
के तं यान्तमनुप्राप्ता: के वास्यासन् पुरोगमा:।
केऽतिष्ठन् के न्यवर्तन्त केऽन्ववर्तन्त संजय॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| संजय! जब वह युद्ध के लिए आगे बढ़ा, तो उसके पीछे कौन-कौन थे, उसके आगे कौन-कौन वीर थे? युद्ध में उसके साथ कौन-कौन थे? युद्ध छोड़कर कौन-कौन भाग गए? और कौन-कौन लोग उसके पीछे-पीछे चले?॥5॥ |
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| Sanjay! When he went ahead for the war, who followed him or who were the brave men in front of him? Who stood with him in the war? Who left the war and ran away? And who all followed him throughout?॥ 5॥ |
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