श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 47-48
 
 
श्लोक  6.14.47-48 
जामदग्न्य: पुरा राम: सर्वास्त्रविदनुत्तम:।
अम्बार्थमुद्यत: संख्ये भीष्मेण युधि निर्जित:॥ ४७॥
तमिन्द्रसमकर्माणं ककुदं सर्वधन्विनाम्।
हतं शंससि मे भीष्मं किं नु दु:खमत: परम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में समस्त अस्त्र-शस्त्रज्ञों में श्रेष्ठ जमदग्निपुत्र परशुराम अम्बा की ओर से युद्ध करने आए थे, किन्तु भीष्म ने उन्हें परास्त कर दिया। तुम कह रहे हो कि इन्द्र के समान पराक्रमी और समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ भीष्म मारे गए हैं। इससे अधिक दुःख की बात और क्या हो सकती है? ॥47-48॥
 
In the past, Jamadagni's son Parashurama, the best among all the experts in weapons, came to fight for Amba, but Bhishma defeated him. You are saying that Bhishma, who was as valiant as Indra and the best among all the archers, has been killed. What can be more saddening than this? ॥47-48॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd