श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 42-44
 
 
श्लोक  6.14.42-44 
य: पुरा विबुधै: सर्वै: सहाये युद्धदुर्मद:।
काङ्क्षितो दानवान् घ्नद्भि: पिता मम महाव्रत:॥ ४२॥
यस्मिञ्जाते महावीर्ये शान्तनुर्लोकविश्रुत:।
शोकं दैन्यं च दु:खं च प्राजहात् पुत्रलक्ष्मणि॥ ४३॥
प्रोक्तं परायणं प्राज्ञं स्वधर्मनिरतं शुचिम्।
वेदवेदाङ्गतत्त्वज्ञं कथं शंससि मे हतम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में समस्त दैत्यों का संहार करने वाले देवताओं ने मेरे पितामह, युद्धरत भीष्म को अपना सहायक बनाने की इच्छा की थी। यशस्वी राजा शांतनु ने अपने पराक्रमी पुत्र के जन्म पर शोक, दारिद्रय और दुःख का सदा के लिए त्याग कर दिया था। वे सब के रक्षक, बुद्धिमान, स्वधर्मनिष्ठ, पवित्र और वेद-वेदांगों के ज्ञाता कहे जाते हैं। आप यह कैसे कह रहे हैं कि वे भीष्म मारे गए?
 
In the past, all the gods who kill demons had desired to make my great father, the war-ridden Bhishma, their assistant. On the birth of his mighty son, the renowned King Shantanu had given up grief, poverty and sorrow forever. He is said to be the protector of all, intelligent, devoted to his own religion, pure and an expert in the Vedas and Vedangas. How are you saying that that Bhishma has been killed?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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