श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.14.41 
यस्य वीर्यं समाश्रित्य मम पुत्रो बृहद्‍बल:।
न पाण्डवानगणयत् कथं स निहत: परै:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
जिनके पराक्रम का आश्रय लेकर विशाल सेनाओं से सुसज्जित मेरे पुत्र ने पाण्डवों को तुच्छ समझा, वे शत्रुओं द्वारा कैसे मारे गए?॥41॥
 
How were they killed by the enemies, taking shelter in whose valour my son, equipped with huge armies, considered the Pandavas as nothing? ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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