|
| |
| |
श्लोक 6.14.38  |
रक्ष्यमाण: कथं वीरैर्गोप्यमानाश्च तेन ते।
दुर्जयानामनीकानि नाजयंस्तरसा युधि॥ ३८॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| जब मेरी ओर से बहुत से वीर पुरुष उनकी रक्षा कर रहे थे और वे भी उन वीर पुरुषों की रक्षा में तत्पर थे, तब उन सबने मिलकर शत्रुओं की अजेय सेनाओं को शीघ्रता से कैसे नहीं परास्त कर दिया ?॥ 38॥ |
| |
| When many brave men from my side were protecting them and they too were devoted to protecting those brave men, then how did all of them together not quickly defeat the invincible armies of the enemy?॥ 38॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|