श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.14.37 
पार्श्वत: केऽभ्यरक्षन्त गच्छन्तो दुर्गमां गतिम्।
समूहे के परान् वीरान् प्रत्ययुध्यन्त संजय॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
संजय! जब वह उस कठिन युद्ध में आगे बढ़ रहा था, तब उसके पार्श्वों की रक्षा किसने की? और उस सेना के आगे कौन खड़ा होकर शत्रु योद्धाओं का वीरतापूर्वक सामना कर रहा था?॥37॥
 
Sanjaya! Who protected his flanks while he advanced into the difficult battle? And who stood in the forefront of that army and bravely faced the enemy warriors?॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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