श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.14.30 
गदासिमकरावासं हयावर्तं गजाकुलम्।
पदातिमत्स्यकलिलं शङ्खदुन्दुभिनि:स्वनम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
उसमें गदा और तलवार मगरमच्छों के समान थे। घोड़ों के भँवरों के कारण वह भयानक प्रतीत हो रहा था, हाथी समुद्र के पतवारों के समान प्रतीत हो रहे थे, पैदल सेना उसमें भरी हुई मछलियों के समान प्रतीत हो रही थी और शंख तथा नगाड़ों की ध्वनि उस समुद्र की गर्जना के समान थी।
 
The mace and the sword were like crocodiles in it. It appeared terrifying due to the whirlpools of horses, the elephants appeared like sea-hulls, the infantry appeared like fishes filled in it and the sound of the conch and drums was the roar of that sea.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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