श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.14.29 
इष्वस्त्रसागरं घोरं बाणग्राहं दुरासदम्।
कार्मुकोर्मिणमक्षय्यमद्वीपं चलमप्लवम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उसके धनुष-बाण आदि आयुध भयंकर और दुर्गम समुद्र के समान थे, बाण स्वयं उसमें मगरमच्छों के समान थे, धनुष लहरों के समान जान पड़ता था, वह अक्षय, द्वीपरहित, चंचल और नाव आदि के समान तरने के साधन से रहित था॥ 29॥
 
His weapons like bow and arrow were like a fearful and inaccessible ocean, the arrows themselves were like crocodiles in it, the bow appeared like waves, it was inexhaustible, without islands, fickle and devoid of means of floating like boats etc.॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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