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श्लोक 6.14.25  |
अश्मसारमयं नूनं हृदयं सुदृढं मम।
यच्छ्रुत्वा पुरुषव्याघ्रं हतं भीष्मं न दीर्यते॥ २५॥ |
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| अनुवाद |
| निश्चय ही मेरा हृदय लोहे के समान दृढ़ है, इसीलिए जब मैं सुनता हूँ कि सिंहपुरुष भीष्म मारे गए, तब भी वह नहीं टूटता! ॥25॥ |
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| Surely my heart is as strong as iron, that is why it does not break when I hear that the lion-man Bhishma has been killed! ॥25॥ |
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