श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.14.25 
अश्मसारमयं नूनं हृदयं सुदृढं मम।
यच्छ्रुत्वा पुरुषव्याघ्रं हतं भीष्मं न दीर्यते॥ २५॥
 
 
अनुवाद
निश्चय ही मेरा हृदय लोहे के समान दृढ़ है, इसीलिए जब मैं सुनता हूँ कि सिंहपुरुष भीष्म मारे गए, तब भी वह नहीं टूटता! ॥25॥
 
Surely my heart is as strong as iron, that is why it does not break when I hear that the lion-man Bhishma has been killed! ॥25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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