Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.14.21-22: जो इन्द्र के समान पराक्रमी और परशुरामजी भी जिन्हें परास्त नहीं कर सकते थे, उन महाबली जमदग्निपुत्र परशुरामजी को भी रणभूमि में चुनौती देने की सदैव इच्छा रखते थे; हे संजय! महारथियों के कुल में उत्पन्न हुए वे महाबली भीष्म रणभूमि में किस प्रकार मारे गए, यह मुझे बताओ; क्योंकि मुझे शान्ति नहीं मिल रही है॥ 21-22॥ | mahabharat अध्याय 6.14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो इन्द्र के समान पराक्रमी और परशुरामजी भी जिन्हें परास्त नहीं कर सकते थे, उन महाबली जमदग्निपुत्र परशुरामजी को भी रणभूमि में चुनौती देने की सदैव इच्छा रखते थे; हे संजय! महारथियों के कुल में उत्पन्न हुए वे महाबली भीष्म रणभूमि में किस प्रकार मारे गए, यह मुझे बताओ; क्योंकि मुझे शान्ति नहीं मिल रही है॥ 21-22॥
Who always desired to challenge even the mighty Jamadagni's son Parashurama on the battlefield, whose prowess was equal to that of Indra and whom even Parashurama could not defeat; Sanjay! Tell me how that great Bhishma, who was born in the clan of mighty warriors, was killed on the battlefield; because I am unable to find peace. ॥ 21-22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥