श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.14.2 
कथमाचक्ष्व मे योधा हीना भीष्मेण संजय।
बलिना देवकल्पेन गुर्वर्थे ब्रह्मचारिणा॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय! मुझे बताओ कि पिता की प्रसन्नता के लिए जीवन भर ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले तथा देवताओं के समान बलवान भीष्म के बिना आज हमारे सैनिकों की क्या दशा है?॥2॥
 
Sanjay! Tell me what is the condition of our soldiers today, without Bhishma who observed celibacy throughout his life to satisfy his father and who was as strong as the gods? ॥2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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