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mahabharat 6.14.15-16: वही भरतवंशी वीर भीष्म जिन्होंने इन्द्र के समान युद्ध में दस दिन तक अपने अक्षय बाणों की वर्षा करके दस करोड़ शत्रु सेनाओं का नाश किया था, वे अब मेरे कुमंत्रण के कारण आँधी से उखड़े हुए वृक्ष के समान युद्ध में मारे जाकर पृथ्वी पर विश्राम कर रहे हैं; वे इसके योग्य कदापि नहीं थे॥15-16॥   |   mahabharat अध्याय 6.14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  6.14.15-16 
य: स शक्र इवाक्षय्यं वर्षं शरमयं क्षिपन्।
जघान युधि योधानामर्बुदं दशभिर्दिनै:॥ १५॥
स शेते निहतो भूमौ वातभग्न इव द्रुम:।
मम दुर्मन्त्रितेनाजौ यथा नार्हति भारत॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वही भरतवंशी वीर भीष्म जिन्होंने इन्द्र के समान युद्ध में दस दिन तक अपने अक्षय बाणों की वर्षा करके दस करोड़ शत्रु सेनाओं का नाश किया था, वे अब मेरे कुमंत्रण के कारण आँधी से उखड़े हुए वृक्ष के समान युद्ध में मारे जाकर पृथ्वी पर विश्राम कर रहे हैं; वे इसके योग्य कदापि नहीं थे॥15-16॥
 
The same heroic Bhishma of the Bharata dynasty who, like Indra, destroyed ten crore enemy armies by showering his inexhaustible arrows for ten days in a war, is now resting on the earth after being killed in the war like a tree uprooted by a storm due to my bad advice; he was never worthy of this. ॥15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)