श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 14: धृतराष्ट्रका विलाप करते हुए भीष्मजीके मारे जानेकी घटनाको विस्तारपूर्वक जाननेके लिये संजयसे प्रश्न करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.14.1 
धृतराष्ट्र उवाच
कथं कुरूणामृषभो हतो भीष्म: शिखण्डिना।
कथं रथात् स न्यपतत् पिता मे वासवोपम:॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - संजय ! मेरे पितातुल्य भीष्म शिखण्डी के हाथों कुरुकुल के श्रेष्ठ पुरुष कैसे मारे गए ? वे तो इन्द्र के समान पराक्रमी थे, फिर भी वे रथ से कैसे गिर पड़े ? 1॥
 
Dhritarashtra said – Sanjay! How were the best men of the Kurukula killed by the hands of my father figure Bhishma Shikhandi? He was as mighty as Indra, how did he fall from the chariot? 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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