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mahabharat 6.122.35: नम्रता और क्रोध को त्यागकर, उत्तम पुरुषों के आचरण का पालन करते हुए, अपनी शक्ति और उत्साह के अनुसार युद्ध करो। तुमने युद्धभूमि में वीरता का परिचय दिया है और तुम उत्तम आचरण वाले पुरुष हो। ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 6.122: भीष्म और कर्णका रहस्यमय संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.122.35 
निर्मन्युर्गतसंरम्भ: कृतकर्मा रणे स्म ह।
यथाशक्ति यथोत्साहं सतां वृत्तेषु वृत्तवान्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
नम्रता और क्रोध को त्यागकर, उत्तम पुरुषों के आचरण का पालन करते हुए, अपनी शक्ति और उत्साह के अनुसार युद्ध करो। तुमने युद्धभूमि में वीरता का परिचय दिया है और तुम उत्तम आचरण वाले पुरुष हो। ॥35॥
 
Leaving behind humility and anger, fight according to your strength and enthusiasm, abiding by the conduct of good men. You have already displayed valour in the battle-field and you are a man of good conduct. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)