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mahabharat 6.122.33: मैंने क्रोधवश अथवा चंचलता के कारण जो कुछ कठोर वचन आपसे कहे हों अथवा जो कुछ प्रतिकूल व्यवहार आपके प्रति किया हो, कृपया मुझे क्षमा करें॥33॥   |   mahabharat अध्याय 6.122: भीष्म और कर्णका रहस्यमय संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.122.33 
दुरुक्तं विप्रतीपं वा रभसाच्चापलात् तथा।
यन्मयेह कृतं किंचित् तन्मे त्वं क्षन्तुमर्हसि॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
मैंने क्रोधवश अथवा चंचलता के कारण जो कुछ कठोर वचन आपसे कहे हों अथवा जो कुछ प्रतिकूल व्यवहार आपके प्रति किया हो, कृपया मुझे क्षमा करें॥33॥
 
Whatever harsh words I may have said to you or whatever unfavorable behavior I may have done to you in a fit of anger or due to fickleness, please kindly forgive me. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)