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mahabharat 6.122.31: हमारा और पाण्डवों का यह वैर अत्यन्त भयंकर हो गया है। अब इसका निवारण नहीं हो सकता। मैं अपने धर्मानुसार प्रसन्न मन से अर्जुन के साथ युद्ध करूँगा॥31॥   |   mahabharat अध्याय 6.122: भीष्म और कर्णका रहस्यमय संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.122.31 
न च शक्यमवस्रष्टुं वैरमेतत् सुदारुणम्।
धनंजयेन योत्स्येऽहं स्वधर्मप्रीतमानस:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हमारा और पाण्डवों का यह वैर अत्यन्त भयंकर हो गया है। अब इसका निवारण नहीं हो सकता। मैं अपने धर्मानुसार प्रसन्न मन से अर्जुन के साथ युद्ध करूँगा॥31॥
 
This enmity between us and the Pandavas has become very fierce. Now it cannot be removed. I will fight with Arjuna with a happy mind according to my Dharma. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)