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mahabharat 6.122.29-30: मैं पाण्डवों और भगवान वसुदेव को सब प्रकार से जानता हूँ। वे अन्य मनुष्यों के लिए सर्वथा अजेय हैं। फिर भी मैं उनसे युद्ध करने के लिए उत्सुक हूँ और मुझे मन में विश्वास है कि मैं युद्ध में पाण्डवों को परास्त कर दूँगा ॥29-30॥   |   mahabharat अध्याय 6.122: भीष्म और कर्णका रहस्यमय संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.122.29-30 
पाण्डवा वासुदेवश्च विदिता मम सर्वश:॥ २९॥
अजेया: पुरुषैरन्यैरिति तांश्चोत्सहामहे।
विजयिष्ये रणे पाण्डूनिति मे निश्चितं मन:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
मैं पाण्डवों और भगवान वसुदेव को सब प्रकार से जानता हूँ। वे अन्य मनुष्यों के लिए सर्वथा अजेय हैं। फिर भी मैं उनसे युद्ध करने के लिए उत्सुक हूँ और मुझे मन में विश्वास है कि मैं युद्ध में पाण्डवों को परास्त कर दूँगा ॥29-30॥
 
I know the Pandavas and Lord Vasudeva in every way. They are absolutely invincible to other men. Nevertheless, I am eager to fight with them and I am sure in my mind that I shall defeat the Pandavas in the battle. ॥29-30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)