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mahabharat 6.122.27-28h: यह युद्ध अवश्यंभावी है। इसे कोई टाल नहीं सकता। भला, पुरुषार्थ से भाग्य को कौन नष्ट कर सकता है? 27 1/2   |   mahabharat अध्याय 6.122: भीष्म और कर्णका रहस्यमय संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.122.27-28h 
अवश्यभावी ह्यर्थोऽयं यो न शक्यो निवर्तितुम्॥ २७॥
दैवं पुरुषकारेण को निवर्तितुमुत्सहेत्।
 
 
अनुवाद
यह युद्ध अवश्यंभावी है। इसे कोई टाल नहीं सकता। भला, पुरुषार्थ से भाग्य को कौन नष्ट कर सकता है? 27 1/2
 
This war is inevitable. No one can avoid it. Well, who can destroy destiny through effort? 27 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)