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श्लोक  6.122.20 
व्यपनीतोऽद्य मन्युर्मे यस्त्वां प्रति पुरा कृत:।
दैवं पुरुषकारेण न शक्यमतिवर्तितुम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
मैंने पहले जो क्रोध तुम्हारे प्रति प्रकट किया था, वह अब दूर हो गया है, क्योंकि भाग्य के नियमों को किसी भी प्रयास से टाला नहीं जा सकता।
 
The anger I had earlier shown towards you has now gone away, because the laws of destiny cannot be averted by any effort.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)