Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.122.15: हे वीर आत्मा! हे देवतुल्य! मनुष्यों में तुम्हारे समान कोई नहीं है। मैं अपने कुल में फूट डालने के भय से सदैव तुमसे कठोर वचन बोलता था॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 6.122: भीष्म और कर्णका रहस्यमय संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 122: भीष्म और कर्णका रहस्यमय संवाद  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.122.15 
न त्वया सदृश: कश्चित् पुरुषेष्वमरोपम।
कुलभेदभयाच्चाहं सदा परुषमुक्तवान्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे वीर आत्मा! हे देवतुल्य! मनुष्यों में तुम्हारे समान कोई नहीं है। मैं अपने कुल में फूट डालने के भय से सदैव तुमसे कठोर वचन बोलता था॥ 15॥
 
O brave soul, like a god! There is no one like you amongst humans. I always spoke harsh words to you for fear of causing division in my clan.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)