Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.121.6-7: कौरव और पाण्डव युद्ध से निवृत्त होकर, कवच उतारकर, शस्त्र फेंककर, पूर्ववत् परस्पर प्रीति रखते हुए, अपनी आयु के अनुसार उचित क्रम से शत्रुओं का नाश करने वाले वीर देवव्रत भीष्म के पास एक साथ बैठ गये। | mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उपारम्य च युद्धेभ्य: संनाहान् विप्रमुच्य ते।
आयुधानि न निक्षिप्य सहिता: कुरुपाण्डवा:॥ ६॥
अन्वासन्त दुराधर्षं देवव्रतमरिंदमम्।
अन्योन्यं प्रीतिमन्तस्ते यथापूर्वं यथावय:॥ ७॥
अनुवाद
कौरव और पाण्डव युद्ध से निवृत्त होकर, कवच उतारकर, शस्त्र फेंककर, पूर्ववत् परस्पर प्रीति रखते हुए, अपनी आयु के अनुसार उचित क्रम से शत्रुओं का नाश करने वाले वीर देवव्रत भीष्म के पास एक साथ बैठ गये।
The Kauravas and the Pandavas, after retiring from the war, taking off their armour and throwing down their weapons, and keeping their mutual love as before, sat together near the brave Devavrata Bhishma, the destroyer of enemies, in the appropriate order according to their age. 6-7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥