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mahabharat 6.121.57: संजय ने कहा, 'हे राजन! जिस प्रकार मरते हुए मनुष्य को कोई औषधि अच्छी नहीं लगती, उसी प्रकार आपके पुत्र को महात्मा भीष्म के वे वचन अच्छे नहीं लगे, जो अत्यन्त हितकारी, दोषरहित तथा धर्म और अर्थ से परिपूर्ण थे।   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  6.121.57 
संजय उवाच
धर्मार्थसहितं वाक्यं श्रुत्वा हितमनामयम्।
नारोचयत पुत्रस्ते मुमूर्षुरिव भेषजम्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा, 'हे राजन! जिस प्रकार मरते हुए मनुष्य को कोई औषधि अच्छी नहीं लगती, उसी प्रकार आपके पुत्र को महात्मा भीष्म के वे वचन अच्छे नहीं लगे, जो अत्यन्त हितकारी, दोषरहित तथा धर्म और अर्थ से परिपूर्ण थे।
 
Sanjaya said, 'O King! Just as a dying man does not like any medicine, in the same way your son did not like the words of Mahatma Bhishma which were very beneficial and flawless and full of Dharma and Artha.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि दुर्योधनं प्रति भीष्मवाक्ये एकविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें दुर्योधनके प्रति भीष्मकाकथनविषयक एक सौ इक्कीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२१॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)