Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.121.56: सभी राजाओं में सामंजस्य बनाए रखने के लिए, गंगापुत्र भीष्म दुर्योधन को यह बात बताकर चुप हो गए। बाणों से उनके नाड़ियों में भयंकर पीड़ा हो रही थी। उन्होंने किसी तरह पीड़ा पर नियंत्रण किया और अपने मन को ईश्वर के चिंतन में लगा दिया। | mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सभी राजाओं में सामंजस्य बनाए रखने के लिए, गंगापुत्र भीष्म दुर्योधन को यह बात बताकर चुप हो गए। बाणों से उनके नाड़ियों में भयंकर पीड़ा हो रही थी। उन्होंने किसी तरह पीड़ा पर नियंत्रण किया और अपने मन को ईश्वर के चिंतन में लगा दिया।
In order to maintain harmony among all the kings, Bhishma, the son of Ganga, became silent after telling this to Duryodhan. The arrows were causing extreme pain in his vital spots. He somehow controlled the pain and engaged his mind in the contemplation of God.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥