Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.121.55: ‘दुर्योधन! यदि तू अपनी मूर्खता और आसक्ति के कारण मेरे समयानुकूल वचनों को नहीं सुनेगा, तो अन्त में पछताएगा और इस युद्ध में तू सब नष्ट हो जाएगा। मैं तुझसे सत्य कहता हूँ।’॥55॥   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  6.121.55 
न चेदेवं प्राप्तकालं वचो मे
मोहाविष्ट: प्रतिपत्स्यस्यबुद्धॺा।
तप्स्यस्यन्ते एतदन्ता: स्थ सर्वे
सत्यामेतां भारतीमीरयामि॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
‘दुर्योधन! यदि तू अपनी मूर्खता और आसक्ति के कारण मेरे समयानुकूल वचनों को नहीं सुनेगा, तो अन्त में पछताएगा और इस युद्ध में तू सब नष्ट हो जाएगा। मैं तुझसे सत्य कहता हूँ।’॥55॥
 
‘Duryodhan! If you do not listen to my timely words due to your foolishness and attachment, then you will regret it in the end and all of you will be destroyed in this war. I am telling you the truth.’॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)