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mahabharat 6.121.54: हे राजन! मेरा जीवन समाप्त हो और प्रजा में शांति हो। सभी राजा आपस में सुखपूर्वक मिलें। पिता अपने पुत्र से, भांजा अपने मामा से और भाई अपने भाई से मिलें।   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  6.121.54 
ममावसानाच्छान्तिरस्तु प्रजानां
संगच्छन्तां पार्थिवा: प्रीतिमन्त:।
पिता पुत्रं मातुलं भागिनेयो
भ्राता चैव भ्रातरं प्रैतु राजन्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मेरा जीवन समाप्त हो और प्रजा में शांति हो। सभी राजा आपस में सुखपूर्वक मिलें। पिता अपने पुत्र से, भांजा अपने मामा से और भाई अपने भाई से मिलें।
 
‘O King! May my life come to an end and there be peace amongst the subjects. May all kings meet each other happily. A father should meet his son, a nephew should meet his maternal uncle and a brother should meet his brother.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)