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mahabharat 6.121.53: तुम पाण्डवों का आधा राज्य दान कर दो। धर्मराज युधिष्ठिर इन्द्रप्रस्थ चले जाओ। हे कौरवराज! ऐसा करने से तुम राजाओं में न तो विश्वासघाती कहलाओगे और न ही नीच कहलाओगे और न ही पापमय अपकीर्ति प्राप्त करोगे॥ 53॥   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  6.121.53 
राज्यस्यार्धं दीयतां पाण्डवाना-
मिन्द्रप्रस्थं धर्मराजोऽभियातु।
मा मित्रध्रुक् पार्थिवानां जघन्य:
पापां कीर्तिं प्राप्स्यसे कौरवेन्द्र॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
तुम पाण्डवों का आधा राज्य दान कर दो। धर्मराज युधिष्ठिर इन्द्रप्रस्थ चले जाओ। हे कौरवराज! ऐसा करने से तुम राजाओं में न तो विश्वासघाती कहलाओगे और न ही नीच कहलाओगे और न ही पापमय अपकीर्ति प्राप्त करोगे॥ 53॥
 
‘You give away half of the Pandava kingdom. Dharmaraja Yudhishthira should go to Indraprastha. O King of Kauravas! By doing this you will not be called a traitor or a mean person among the kings and you will not get a sinful bad reputation.॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)