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mahabharat 6.121.51: अनघ! मैंने जो बातें तुमसे कही हैं, वे तुम्हें रुचिकर लगें। मैं इस संधि को तुम्हारे और कौरव कुल के लिए हितकर समझता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.121.51 
एतत् तु रोचतां वाक्यं यदुक्तोऽसि मयानघ।
एतत् क्षेममहं मन्ये तव चैव कुलस्य च॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
अनघ! मैंने जो बातें तुमसे कही हैं, वे तुम्हें रुचिकर लगें। मैं इस संधि को तुम्हारे और कौरव कुल के लिए हितकर समझता हूँ।
 
Anagh! May the things I have told you seem interesting to you. I consider the treaty to be beneficial for you and the Kaurava clan. 51.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)