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mahabharat 6.121.49-50: महाराज! मुझे अच्छा लगता है कि आप पांडव योद्धाओं के साथ तब तक सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखें जब तक नकुल, सहदेव और पांडव पुत्र भीमसेन मिलकर आपकी सेना का विनाश न कर दें। हे महाराज! यह युद्ध मेरे साथ ही समाप्त हो जाना चाहिए। आपको पांडवों के साथ संधि कर लेनी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 49-50
 
 
श्लोक  6.121.49-50 
नकुल: सहदेवश्च भीमसेनश्च पाण्डव:।
यावच्चमूं महाराज नाशयन्ति न सर्वश:॥ ४९॥
तावत् ते पाण्डवैर्वीरै: सौहार्दं मम रोचते।
युद्धं मदन्तमेवास्तु तात संशाम्य पाण्डवै:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! मुझे अच्छा लगता है कि आप पांडव योद्धाओं के साथ तब तक सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखें जब तक नकुल, सहदेव और पांडव पुत्र भीमसेन मिलकर आपकी सेना का विनाश न कर दें। हे महाराज! यह युद्ध मेरे साथ ही समाप्त हो जाना चाहिए। आपको पांडवों के साथ संधि कर लेनी चाहिए।
 
‘Maharaj! I like that you should maintain cordial relations with the Pandava warriors until Nakul, Sahadeva and Pandava's son Bhimsen together destroy your army. O dear! This war should end with me. You should make peace with the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)