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mahabharat 6.121.48: पिताश्री! जब तक युधिष्ठिर क्रोध में आकर आपकी सारी सेना को रणभूमि में जलाकर राख न कर दें, तब तक आपको उनसे संधि कर लेनी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  6.121.48 
न निर्दहति ते यावत् क्रोधदीप्तेक्षणश्चमूम्।
युधिष्ठिरो रणे तावत् संधिस्ते तात युज्यताम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! जब तक युधिष्ठिर क्रोध में आकर आपकी सारी सेना को रणभूमि में जलाकर राख न कर दें, तब तक आपको उनसे संधि कर लेनी चाहिए।
 
Father! Until Yudhishthira burns your entire army to ashes in the battlefield in rage, you should enter into a treaty with him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)