Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.121.47: हे राजन! जब तक युद्ध में बचे हुए आपके भाईगण उपस्थित हैं और जब तक अनेक राजा जीवित हैं, तब तक आपको अर्जुन के साथ संधि कर लेनी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  6.121.47 
यावत् तिष्ठन्ति समरे हतशेषा: सहोदरा:।
नृपाश्च बहवो राजंस्तावत् संधि: प्रयुज्यताम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जब तक युद्ध में बचे हुए आपके भाईगण उपस्थित हैं और जब तक अनेक राजा जीवित हैं, तब तक आपको अर्जुन के साथ संधि कर लेनी चाहिए।
 
O King! As long as your brothers who have survived the battle are still present and as long as many kings are still alive, you should enter into a treaty with Arjun. 47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)