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mahabharat 6.121.46: पिताश्री, इससे पहले कि अर्जुन अपने मुड़े हुए बाणों से आपकी सम्पूर्ण सेना को नष्ट कर दे, आपको उसके साथ संधि कर लेनी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  6.121.46 
यावन्न ते चमू: सर्वा: शरै: संनतपर्वभि:।
नाशयत्यर्जुनस्तावत् संधिस्ते तात युज्यताम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री, इससे पहले कि अर्जुन अपने मुड़े हुए बाणों से आपकी सम्पूर्ण सेना को नष्ट कर दे, आपको उसके साथ संधि कर लेनी चाहिए।
 
Father, you should enter into a treaty with Arjuna before he destroys your entire army with his bent-knotted arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)