Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.121.39: दुर्योधन! तुमने अपनी आँखों से देखा है कि बुद्धिमान अर्जुन ने किस प्रकार शीतल और अमृत के समान सुगन्धित जल की धारा उत्पन्न की है।' 39 | mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दृष्टं दुर्योधनैतत् ते यथा पार्थेन धीमता।
जलस्य धारा जनिता शीतस्यामृतगन्धिन:॥ ३९॥
अनुवाद
दुर्योधन! तुमने अपनी आँखों से देखा है कि बुद्धिमान अर्जुन ने किस प्रकार शीतल और अमृत के समान सुगन्धित जल की धारा उत्पन्न की है।' 39
Duryodhana! You have seen with your own eyes, the way the wise Arjuna has created a stream of water which is cool and has a sweet smell like nectar.' 39
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥