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mahabharat 6.121.38: भीष्म के ये वचन सुनकर कौरवराज दुर्योधन मन ही मन बहुत दुःखी हुआ। तब शान्तनुपुत्र भीष्म ने उसकी ओर देखकर कहा - 'राजन्! मेरी बात पर ध्यान दो और क्रोध से मुक्त हो जाओ।'   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.121.38 
एतच्छ्रुत्वा तद्वच: कौरवेन्द्रो
दुर्योधनो दीनमना बभूव।
तमब्रवीच्छान्तनवोऽभिवीक्ष्य
निबोध राजन् भव वीतमन्यु:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
भीष्म के ये वचन सुनकर कौरवराज दुर्योधन मन ही मन बहुत दुःखी हुआ। तब शान्तनुपुत्र भीष्म ने उसकी ओर देखकर कहा - 'राजन्! मेरी बात पर ध्यान दो और क्रोध से मुक्त हो जाओ।'
 
Hearing these words of Bhishma, the Kaurava king Duryodhan became very sad in his heart. Then Shantanu's son Bhishma looked at him and said - 'King! Pay attention to what I say and become free from anger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)